पवित्र गंगा, घाघरा (सरयू) एवं गंडक नदियों के संगम पर बसा सारण जिला प्राचीन नवपाषाण कालीन सभ्यता का पालना, वैदिक ऋषियों की तपोभूमि, स्वाधीनता संग्राम का महाकेंद्र एवं भोजपुरी लोक-संस्कृति की अमर जन्मस्थली है।
प्राचीन चिरांद युग
सरकार सारण (मुग़ल काल)
क्रांतियों की महाभूमि
नदियों की पावन गोद
सारण नाम की उत्पत्ति प्राचीन संस्कृत साहित्य, वेदों और जनश्रुतियों में अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है:
छपरा से लगभग 11 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में दिघवारा के निकट गंगा नदी के उत्तरी तट पर स्थित चिरांद भारत के सबसे महत्वपूर्ण और प्राचीन पुरातात्विक उत्खनन स्थलों में से एक है।
मुगल बादशाह अकबर (1556–1605 ई.) के शासनकाल में अबुल फज़ल द्वारा रचित प्रसिद्ध ग्रंथ आईन-ए-अकबरी (1582 ई.) में बिहार सूबे के अंतर्गत सरकार सारण का उल्लेख मिलता है। उस समय सरकार सारण में 17 महाल (परगने) शामिल थे, जिनमें वर्तमान सारण, सीवान, गोपालगंज एवं चंपारण के हिस्से आते थे।
नदीय व्यापार का स्वर्णिम युग: रेलवे के आगमन से पूर्व घाघरा एवं गंगा नदियाँ व्यापार का प्रमुख जलमार्ग थीं। छपरा और रिविलगंज (गोदना) बड़े नदीय बंदरगाह बने। डच (हॉलैंड), फ्रांसीसी, पुर्तगाली एवं ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने छपरा में अपनी व्यापारिक कोठियां (Factories) स्थापित कीं।
सारण विश्व स्तर पर उच्च कोटि के शोरा (पोटैशियम नाइट्रेट) के उत्पादन का प्रमुख केंद्र था, जिसका उपयोग यूरोप में बारूद निर्माण के लिए किया जाता था। इसके अतिरिक्त अफीम, नील, सूती वस्त्र और अनाज का भारी व्यापार होता था।
1917 के चंपारण सत्याग्रह से लेकर 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन और 1974 की संपूर्ण क्रांति तक, सारण की धरती ने ऐसे महान राष्ट्रनायकों को जन्म दिया जिन्होंने आधुनिक भारत के इतिहास की धारा बदल दी।
जन्म: सिताब दियारा, सारण (1902–1979)
1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के महानायक (हजारीबाग जेल ब्रेक), आजाद दस्ता के संस्थापक एवं 1974 में भारतीय लोकतंत्र की रक्षा हेतु संपूर्ण क्रांति (Total Revolution) का शंखनाद करने वाले युगपुरुष। 1999 में भारत रत्न से सम्मानित।
जन्म: जीरादेई (अविभाजित सारण, 1884–1963)
भारत के प्रथम राष्ट्रपति, भारतीय संविधान सभा के स्थायी अध्यक्ष एवं महात्मा गांधी के प्रमुख सहयोगी। सादगी और विद्वता की प्रतिमूर्ति, 1962 में भारत रत्न से सम्मानित।
फरीदपुर / आशियाना (1866–1930)
हिंदू-मुस्लिम एकता के प्रतीक, बिहार विद्यापीठ व सदाकत आश्रम पटना के संस्थापक। सारण प्रमंडल में उनका निवास 'आशियाना' स्वतंत्रता सेनानियों का प्रमुख विचार केंद्र था।
सारण / चंपारण आंदोलन
गांधीजी के अभिन्न सहयोगी जिन्होंने चंपारण सत्याग्रह की नींव रखी। वे लोकनायक जयप्रकाश नारायण की धर्मपत्नी व प्रमुख स्वाधीनता सेनानी प्रभावती देवी के पिता थे।
मिश्रवलिया, जलालपुर (1886–1946)
भोजपुरी पूर्वी गायन शैली के जनक एवं महान संगीतकार, जिन्होंने अंग्रेजों के विरुद्ध गुप्त रूप से जाली नोट छापकर भारतीय क्रांतिकारियों को हथियार व आर्थिक मदद उपलब्ध कराई।
अमवारी सत्याग्रह, सारण (1939)
महापंडित राहुल सांकृत्यायन ने सारण के अमवारी गांव में किसानों के बकाश्त आंदोलन का नेतृत्व किया और लाठी चार्ज सहते हुए किसानों को जमींदारी शोषण से मुक्ति दिलाई।
सारण जिले के कुतुबपुर गांव में जन्मे भिखारी ठाकुर (18 दिसंबर 1887 – 10 जुलाई 1971) को भोजपुरी भाषा का सबसे महान नाटककार, गीतकार, अभिनेता और समाज सुधारक माना जाता है। उन्हें "भोजपुरी का शेक्सपियर" और "राय बहादुर" की उपाधि से नवाजा गया।
उनके अमर नाटकों—विशेष रूप से बिदेसिया, गबरघिचोर, बेटी बेचवा, राधेश्याम बहार और भाई बिरोध—ने पलायन, गरीबी, नारी उत्पीड़न, बाल विवाह और जातिगत कुरीतियों पर गहरा प्रहार किया तथा मॉरीशस, फिजी, त्रिनिदाद और सूरीनाम तक भोजपुरी संस्कृति को पहुंचाया।
भिखारी ठाकुर (1887 – 1971)
सारण के 20 प्रखंडों में फैले पौराणिक, ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक तीर्थ स्थलों का परिचय।
गंगा तट पर स्थित प्रसिद्ध शक्तिपीठ। दुर्गा सप्तशती के अनुसार राजा सुरथ और समाधि वैश्य की तपस्थली तथा माता सती के पावन यज्ञ कुण्ड से जुड़ा ऐतिहासिक तीर्थ।
गंडक और गंगा के पावन संगम पर स्थित भगवान विष्णु (हरि) और भगवान शिव (हर) का अद्वितीय संयुक्त मंदिर। यहीं एशिया का सबसे बड़ा ऐतिहासिक सोनपुर पशु मेला लगता है।
सरयू नदी के तट पर स्थित महर्षि गौतम का प्राचीन आश्रम। मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम द्वारा माता अहिल्या के उद्धार की तपोभूमि।
पौराणिक काल का प्राचीन शिव मंदिर जो राजा मोहिनी और नारद मुनि की कथा से जुड़ा है। यहां महाशिवरात्रि पर विशाल मेला लगता है।
परसा प्रखंड में स्थित प्राचीन तपोस्थली और मंदिर परिसर, जो संतों की साधना, गुफाओं और वैदिक अनुष्ठानों के लिए प्रसिद्ध है।
सरयू और गंगा नदी का पवित्र संगम स्थल। पवित्र स्नान, सूर्य ग्रहण पर्व और ऐतिहासिक जल परिवहन का महत्वपूर्ण केंद्र।
गंगा के तट पर उन्नत कृषि, हिरण के सींग के औजार, मिट्टी के गोल मकान और नदीय व्यापार का विकास।
गौतम ऋषि द्वारा गोदना में आश्रम की स्थापना। मौर्य सम्राटों द्वारा सोनपुर (हरिहर क्षेत्र) में गज और अश्व व्यापार को संरक्षण।
आईन-ए-अकबरी में 17 महालों के साथ सरकार सारण का उल्लेख, जो बिहार सूबे का प्रमुख उपजाऊ और राजस्व क्षेत्र बना।
छपरा और रिविलगंज अंतरराष्ट्रीय नदी बंदरगाह के रूप में उभरे; बारूद निर्माण हेतु शोरा, अफीम और सूती कपड़ों का निर्यात।
बक्सर के युद्ध के बाद सारण को प्रशासनिक जिला बनाया गया। 1866 में चंपारण को सारण से अलग किया गया।
ब्रजकिशोर प्रसाद, डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, राहुल सांकृत्यायन और जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में अभूतपूर्व जनक्रांति।
1972 में सीवान और गोपालगंज पृथक जिले बने तथा 1981 में छपरा को सारण प्रमंडल का मुख्यालय बनाया गया।
22 नवंबर 1990 को छपरा में जयप्रकाश विश्वविद्यालय की स्थापना कर उच्च शिक्षा का विस्तार किया गया।
ऑफ़रप्लांट टेक्नोलॉजीज प्रा. लि. के 9वें स्थापना दिवस पर सारण के 20 प्रखंडों को डिजिटली जोड़ने हेतु सारण इंडेक्स का शुभारंभ।
सारण जिले का कालक्रम, पुरातात्विक उत्खनन तथ्य और प्रशासनिक इतिहास अधिकृत सरकारी अभिलेखों, पुरातात्विक रिपोर्टों एवं ऐतिहासिक ग्रंथों से संकलित किए गए हैं:
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